करवा चौथ भारतीय महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जो मुख्य रूप से पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।
सावित्री और सत्यवान की कथा: सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस पाने के लिए कठोर तप और उपवास किया था। उनकी दृढ़ भक्ति और प्रेम ने यमराज को सत्यवान का जीवन वापस देने पर मजबूर कर दिया। करवा चौथ का व्रत इसी कथा से प्रेरित माना जाता है।
करवा की कहानी: करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री ने अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए अपने तप और साहस का उपयोग किया। उसकी भक्ति से भगवान प्रसन्न हुए और उसके पति की रक्षा की। यही वजह है कि इस व्रत को करवा चौथ कहा जाता है।
महाभारत से संबंध: जब अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि पर्वत गए थे, तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से अपने परिवार की रक्षा का उपाय पूछा। श्रीकृष्ण ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने का सुझाव दिया, जिससे उनके परिवार की रक्षा हुई।
करवा चौथ भारतीय संस्कृति में दांपत्य जीवन के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।