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Worship with extra devotion

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Saurabh GuptaNov 20, 2024

kyu manaya jata hain karwa chouth

करवा चौथ भारतीय महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है, जो मुख्य रूप से पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं।

करवा चौथ मनाने के पीछे की कथाएं:

सावित्री और सत्यवान की कथा: सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस पाने के लिए कठोर तप और उपवास किया था। उनकी दृढ़ भक्ति और प्रेम ने यमराज को सत्यवान का जीवन वापस देने पर मजबूर कर दिया। करवा चौथ का व्रत इसी कथा से प्रेरित माना जाता है।

करवा की कहानी: करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री ने अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए अपने तप और साहस का उपयोग किया। उसकी भक्ति से भगवान प्रसन्न हुए और उसके पति की रक्षा की। यही वजह है कि इस व्रत को करवा चौथ कहा जाता है।

महाभारत से संबंध: जब अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि पर्वत गए थे, तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण से अपने परिवार की रक्षा का उपाय पूछा। श्रीकृष्ण ने उन्हें करवा चौथ का व्रत रखने का सुझाव दिया, जिससे उनके परिवार की रक्षा हुई।

व्रत का महत्व:

  • इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं और दिनभर बिना अन्न और पानी ग्रहण किए व्रत रखती हैं।
  • पूजा के दौरान करवे (मिट्टी का घड़ा) में जल भरकर भगवान शिव, माता पार्वती, और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
  • चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ा जाता है।

करवा चौथ भारतीय संस्कृति में दांपत्य जीवन के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।